राजा अज और इन्दुमती का प्रसंग
राजा अज (39वीं पीढ़ी) के विवाह की कथा वाल्मीकि रामायण के संदर्भों में अत्यंत विह्वल कर देने वाली है। विदर्भराज की पुत्री इन्दुमती के स्वयंवर में राजा अज को आमंत्रित किया गया था। वहां इंदुमती ने राजा अज को ही अपना पति चुना और माला पहनाई। वे दोनों सुखपूर्वक अयोध्या लौट आए और अज का राज्याभिषेक हुआ। उनके पुत्र दशरथ का जन्म हुआ। एक दिन जब राजा अज और इंदुमती उद्यान में विहार कर रहे थे, तभी आकाश मार्ग से गुजरते हुए नारद मुनि के हाथ से एक दिव्य पुष्पमाला गिरी। वह माला सीधे इंदुमती के गले में जा गिरी और उसी क्षण उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। यह कोई सामान्य मृत्यु नहीं थी, बल्कि एक शाप का अंत था। राजा अज अपनी प्रिय पत्नी के वियोग में गहरे शोक में डूब गए और उन्होंने बहुत समय तक उस विरह को सहा। यह प्रसंग रघुकुल के राजाओं के मानवीय भावों और उनके व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों को दर्शाता है।
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