राजा सगर और साठ हजार पुत्रों का प्रसंग
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Shalin Tuwani
📅 22 अप्रैल 2026
राजा सगर (20वीं पीढ़ी) के दो रानियां थीं—केशिनी और सुमति। केशिनी से असमंजस नामक पुत्र हुआ और सुमति के गर्भ से साठ हजार पुत्रों ने जन्म लिया। एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ के अश्व की रक्षा की जिम्मेदारी उनके साठ हजार पुत्रों को दी गई। इंद्र ने ईर्ष्यावश उस घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के पास बांध दिया। सगर के पुत्रों ने पृथ्वी खोद डाली और अंततः पाताल में कपिल मुनि के पास घोड़े को देखा। मुनि के ध्यान में विघ्न डालने के कारण उनके क्रोध से निकले अग्नि-जाल ने सगर के सभी साठ हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। बाद में उनके वंशज अंशुमान, दिलीप और अंत में भगीरथ ने कठोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप गंगा का अवतरण हुआ और सगर के पुत्रों को मुक्ति प्राप्त हुई। यह कथा वंश की निरंतरता और पूर्वजों के प्रति ऋण चुकाने की पराकाष्ठा है।
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